Ghar
PoprapMale Vocal
Creato da:Sunoi
Creato:20 ago 2026
Durata:3:34
माँ की आँखों में नींद नहीं, बेटी के सपनों में रंग नहीं, बाप खड़ा है टूटी चौखट पर, जेब में उसके ढंग नहीं। बहन छुपाकर रोती है, कि माँ को दर्द न हो जाए, इस छोटे से टूटे घर में, कौन किसको अब समझाए। [मुखड़ा] जिस घर के सिर पर कोई हाथ नहीं, उस घर की खुशियों की बात नहीं… माँ रोती है चुपके-चुपके, बेटी की आँखों में रात सही। बाप कहता है “सब ठीक होगा”, पर आवाज़ में विश्वास नहीं… जिस घर के सिर पर कोई हाथ नहीं, उस घर की खुशियों की बात नहीं… [अंतरा 2] बेटी माँ से पूछे धीरे से, “माँ, अपना भी कोई कल होगा?” माँ आँसू पीकर कह देती है, “हाँ बेटी… सब अच्छा होगा।” बाप की हथेली खाली है, फिर भी बच्चों को हँसाता है, खुद भूखा सो जाता है अक्सर, पर घर में खाना बनवाता है। बहन ने अपनी चाहत छोड़ी, भाई की फीस बचाने को, कितने सपने दफना दिए उसने, बस घर को बचाने को। [मुखड़ा] जिस घर के सिर पर कोई हाथ नहीं, उस घर की खुशियों की बात नहीं… माँ रोती है चुपके-चुपके, बेटी की आँखों में रात सही। बाप कहता है “सब ठीक होगा”, पर आवाज़ में विश्वास नहीं… जिस घर के सिर पर कोई हाथ नहीं, उस घर की खुशियों की बात नहीं… [ब्रिज] काश कोई आकर पूछे उनसे, “क्यों आँखों में पानी है?” काश कोई बाप के कंधे पर, रख दे हाथ—“मैं हूँ, परेशानी क्या है?” माँ को फिर से हँसता देखूँ, बेटी को सपने सजाते देखूँ, बहन के चेहरे पर खुशी हो, बाप को चैन से सोते देखूँ। [आखिरी अंतरा] घर छोटा है, दर्द बड़ा है, फिर भी रिश्ता सबसे खरा है… चार लोग हैं, चारों टूटे, फिर भी एक-दूजे का सहारा है। जिस दिन इस घर में हँसी लौटेगी, शायद किस्मत भी रोएगी… क्योंकि जिस घर ने दर्द सहा हो, उसकी खुशी सबसे बड़ी होगी। [आउट्रो] माँ की आँखें नम हैं आज भी, बेटी चुप है, बाप अकेला… बहन ने सबको संभाल लिया, पर खुद को कौन संभालेगा… 💔 जिस घर के सिर पर कोई हाथ नहीं… वहाँ बच्चे उम्र से पहले बड़े हो जाते हैं।
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