तोहरे बिना लागे ना मनवा हो, सूना-सूना लागे आँगनवा हो। तोहरे नामे धड़के दिलवा दिन-रात, तू ही हउ दिल के पहचान हो। [अंतरा 1] जबसे देखनी तोहरा के पहली बेर, दिलवा में उठल अजब लहर। तोहर मुस्की जैसे चाँदनी रात, तोहरे खातिर जागीं सारी रात। तोहर बोली मिश्री से मीठ लागे, तोहर याद दिलवा के पास लागे। दूर रहके भी तू करीब लागेलू, सपना में रोज हमरा से बतियावेलू। [मुखड़ा] तोहरे बिना लागे ना मनवा हो, सूना-सूना लागे आँगनवा हो। तोहरे नामे धड़के दिलवा दिन-रात, तू ही हउ दिल के पहचान हो। [अंतरा 2] बरखा के बूंद जब धरती पे आवे, मनवा तोहरे याद में भींज जावे। गाँव के गलियन में खोजीं तोहरा, हर मोड़ पे लागे तू मिलबू हमरा। रउरा साथ रहे त दुनिया हँसी, रउरा बिना खुशी लागे अधूरी। दिल से बस एके बात कहब आज, तोहरे संग बितावे के बा हर शाम। [अंतिम मुखड़ा] तोहरे बिना लागे ना मनवा हो, तोहरे संग सजल बा सपना हो। जनम-जनम तक साथ निभाइब हम, तू ही हउ दिल के अपना हो। तोहरे बिना लागे ना मनवा हो… तोहरे बिना लागे ना मनवा हो… ❤️
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